Hypersonic Cruise Missile एक बहुत एडवांस्ड मिसाइल है जो आवाज़ की स्पीड से कम से कम पाँच गुना ज़्यादा स्पीड से चलती है, जो लगभग Mach 5 या उससे ज़्यादा होती है। इस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल होता है और इस वजह से दुश्मन के रडार और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को इसकी ज़्यादा स्पीड की वजह से मुश्किल होती है। हाइपरसोनिक मिसाइलें अपनी उड़ान के दौरान मैन्यूवर भी कर सकती हैं, इसलिए ये ज़्यादा असरदार और खतरनाक होती हैं।
भारत में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) प्रोजेक्ट विष्णु नाम के एक प्रोजेक्ट में Hypersonic Cruise Missiles डेवलप कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद तेज़ मिसाइल टेक्नोलॉजी बनाना है जो दुनिया में भारतीय डिफेंस सिस्टम को मज़बूत करेगी। मिसाइल की मुख्य खासियतें Mach 8 की हाई स्पीड, उड़ान की हाई रेंज और ज़मीन के साथ-साथ समुद्र और हवा में भी लॉन्च करने की क्षमता है।
ET-LDHCM (Extended Trajectory-Long Duration Hypersonic Cruise Missile), एक हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है जिसे विष्णु के लॉन्ग प्रोजेक्ट के तहत डेवलप किया गया था, इसे प्रोजेक्ट विष्णु के नाम से जाना जाता है। यह मिसाइल भारत की नई डिफेंस टेक्नोलॉजी की जगह बदल देती है, जिससे भविष्य में देश की मिलिट्री ताकत बढ़ती है।
डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी
ET-LDHCM (Extended Trajectory-Long Duration Hypersonic Cruise Missile) एक एडवांस्ड हाइपरसोनिक मिसाइल है जिसे भारत के DRDO ने प्रोजेक्ट विष्णु के हिस्से के तौर पर डिजाइन किया था। यह मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन टेक्नोलॉजी पर डेवलप की गई है जो बहुत तेज़ स्पीड से लंबी दूरी की उड़ान भरने के लिए फ्यूल जलाने के लिए एटमोस्फेरिक ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती है। स्क्रैमजेट इंजन नॉर्मल रॉकेट इंजन की तुलना में ज़्यादा फ्यूल एफिशिएंट है और साथ ही मिसाइल को Mach 8, या लगभग 11,000 किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा की स्पीड से चलने देता है।
ET-LDHCM के डिजाइन में खास हीट रेजिस्टेंट मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है जो हवा में 2000 डिग्री सेल्सियस तक का टेम्परेचर झेल सकता है। इसकी सतह पर ऑक्सीडेशन रेजिस्टेंट कोटिंग भी है, जो इसे समुद्र और बहुत ज़्यादा धूप से बचाती है। मिसाइल की खासियतें हैं लो-लेवल उड़ान, रडार से बचने और हवा में अपना रास्ता बदलने की इसकी क्षमता, जिससे यह दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल हो जाती है।
इस प्रोजेक्ट के तहत, ET-LDHCM को डेवलप किया जाएगा और इससे भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक बन जाएगा जो हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी में सबसे आगे होंगे। यह मिसाइल कन्वेंशनल और न्यूक्लियर दोनों तरह की लड़ाइयों में काम आ सकती है और यह लंबी दूरी के टारगेट को एकदम सटीक तरीके से मार गिराएगी, जिससे भारत की सुरक्षा बहुत मज़बूत होगी।
टेक्निकल फीचर्स
हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल में लेटेस्ट टेक्निकल फीचर्स हैं। इसकी उड़ान की रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है, हालांकि सरफेस टू सरफेस मिसाइल लॉन्च में इसे 2500 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। यह मिसाइल सुखोई Su-30MKI और इंडियन आर्मी और डसॉल्ट राफेल जैसे एयरक्राफ्ट के साथ ज़मीन, समुद्र और हवा से अलग-अलग प्लेटफॉर्म से फायर की जा सकती है।
ET-LDHCM सिक्योरिटी और स्टेल्थ टेक्नोलॉजी के मामले में रडार से बच जाती है, क्योंकि यह हवा में नीचे उड़ती है। साथ ही, प्लाज़्मा स्टेल्थ इफ़ेक्ट इसे रडार क्रॉस सेक्शन के मामले में छोटा बनाने में मदद करता है और इस तरह इसका पता लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। यह मिसाइल इन-फ़्लाइट मैनूवर भी कर सकती है, यानी उड़ान के दौरान दिशा बदलना, जो एयर डिफ़ेंस सिस्टम के लिए एक बड़ा खतरा है।
ET-LDHCM का पेलोड 1,000 से 2,000 किलोग्राम है जिसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक वॉरहेड हो सकते हैं। यह मिसाइल दुश्मनों की किलेबंदी, कमांड सेंटर और बड़े मिलिट्री बेस पर सटीक निशाना लगा सकेगी। ये खासियतें इसे भारतीय डिफ़ेंस पावर की एक बड़ी कामयाबी बनाती हैं, खासकर रीजनल सिक्योरिटी के मामले में।
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स्ट्रेटेजिक महत्व और इस्तेमाल
भारत की हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की ज़बरदस्त स्ट्रेटेजिक वैल्यू है। यह मिसाइल भारत को डिफ़ेंस के मामले में एक नए लेवल पर ले जा सकती है क्योंकि इसकी 1500 किलोमीटर की रेंज और Mach 8 प्लस स्पीड इस मिसाइल को दुश्मनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनाती है। इस मिसाइल का रीजन की सिक्योरिटी पर भी गंभीर असर पड़ेगा, खासकर साउथ एशिया में। इस मिसाइल में पाकिस्तान और चीन के अंदर ज़रूरी टारगेट को हिट करने की कैपेबिलिटी है, जिसका असर इस इलाके में पावर इक्विलिब्रियम पर पड़ता है।
ब्रह्मोस और अग्नि सीरीज़ जैसे मिसाइल सिस्टम के साथ भारत के डिफेंस सिस्टम को और मज़बूत करता है। हाई स्पीड अग्नि के साथ हाइपरसोनिक वेपनरी की मौजूदगी से भारत के पास एक मज़बूत डिफेंस सिस्टम है, जिसकी रेंज ज़्यादा है और इसका मतलब है कि मिसाइल ज़्यादा एक्यूरेट है। यह इंटीग्रेटेड मिसाइल सिस्टम स्ट्रेटेजिक लेवल पर दुश्मनों को पीछे धकेलता है और भारत को एक काबिल और अप-टू-डेट मिलिट्री फोर्स बनाता है।
प्रोजेक्ट विष्णु में बनाई गई यह मिसाइल भारत को हाइपरसोनिक मिसाइलों की दुनिया में एंट्री दिलाएगी और डिफेंस टेक्नोलॉजी के भविष्य में एक बड़ी कामयाबी साबित होगी।
हाल की सफलताएँ और टेस्ट
जुलाई 2025 में, प्रोजेक्ट विष्णु के तहत DRDO ने ET-LDHCM के साथ स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का टेस्ट फ़्लाई किया। इस मिसाइल की स्पीड Mach 8 है, जो लगभग 11,000km/h है, इसीलिए यह दुनिया की सबसे तेज़ मिसाइलों में से एक है। इस टेस्ट के ज़रिए, भारत को हाइपरसोनिक मिसाइलों की टेक्नोलॉजी में टॉप देशों में से एक का दर्जा मिला है।
DRDO प्रोजेक्ट विष्णु के तहत मिसाइल को लगातार डेवलप और बेहतर भी कर रहा है। रेंज, एक्यूरेसी और लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म के मामले में मिसाइल की क्षमताओं में और सुधार की योजना बनाई गई है ताकि इस मिसाइल को ज़मीन, समुद्र और हवा में किसी भी कंडीशन में आसानी से सफलतापूर्वक फ़ायर किया जा सके। इसके अलावा, इसने उड़ान के दौरान मिसाइलों की स्टेल्थ क्षमताओं और मैन्यूवरैबिलिटी को बढ़ाया है, जिसका मतलब है कि यह दुश्मन के एयर डिफ़ेंस सिस्टम पर तेज़ी से हमला कर सकती है।
कहा जा सकता है कि ET-LDHCM टेस्ट भारत की स्ट्रेटेजिक क्षमताओं को नए लेवल पर ले जाएगा और रीजनल सिक्योरिटी में भी एक बड़ा कदम होगा।
निष्कर्ष: भारत में हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम ने भारत में डिफेंस टेक्नोलॉजी को बदल दिया है। एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी-लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल, जो आवाज़ की स्पीड से कई गुना तेज़ चलती हैं, भारत को दुनिया में एक जियो-स्ट्रेटेजिक पोजीशन पर लाता है। इस टेक्नोलॉजी ने न सिर्फ़ भारत की डिफेंस कैपेबिलिटी को बढ़ाया है, बल्कि इसने साउथ एशिया में मिलिट्री डायनामिक्स को भी बहुत बदल दिया है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें भविष्य में भारत के स्ट्रेटेजिक अप्रोच का आधार होंगी। ये मिसाइलें दुश्मनों के लिए एक बड़ा खतरा हैं क्योंकि ये बहुत तेज़, स्टेल्थी हैं और हवा में ही मैन्यूवर करती हैं। ये भारत की स्ट्रेटेजिक डिपेंडेंस को कम करेंगी और डिफेंस एक्सपोर्ट और कोलेबोरेशन के नए एरिया बनाएंगी। प्रोजेक्ट विष्णु जैसे प्रोजेक्ट्स के आधार पर, भारत अब टेक्नोलॉजिकल सेल्फ डिपेंडेंस की ओर बढ़ रहा है जो इस क्षेत्र में नेशनल सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी को बढ़ाता है।
इसलिए, भारतीय हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोजेक्ट सिर्फ़ डिफेंस के क्षेत्र में एक ब्रेकथ्रू नहीं है, बल्कि यह देश के स्ट्रेटेजिक इम्पैक्ट और सिक्योरिटी दोनों को एक इंपल्स भी देता है।
FAQ’s
1. हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्या होती है?
Hypersonic cruise missile वह मिसाइल होती है जो ध्वनि की गति से कम से कम 5 गुना तेज चलती है, लगभग Mach 5 या उससे अधिक। यह तेज़ गति, स्टील्थ और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता रखती है।
2. भारत की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कौन सी है?
भारत की प्रमुख हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है ET-LDHCM, जिसे DRDO ने प्रोजेक्ट विष्णु के तहत विकसित किया है।
3. ET-LDHCM की स्पीड और रेंज क्या है?
ET-LDHCM मिसाइल की गति Mach 8 (लगभग 11,000 किमी/घंटा) से अधिक है और इसकी उड़ान रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है।
4. इस मिसाइल का पेलोड कैसा होता है?
इसका पेलोड 1000-2000 किलोग्राम तक होता है, जिसमें परमाणु और पारंपरिक वारहेड शामिल हो सकते हैं।
5. यह मिसाइल कहां से लॉन्च की जा सकती है?
इस मिसाइल को जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च किया जा सकता है।







